एक बच्चे ने दौड़ते हुए आकर कहा " अरे बारात आ गईं है...केनाल बावड़ी तक पहोंच गई है...
ये सुनते ही दुल्हन के घरका माहौल गरमा गया..किसी बुज़ुर्गने कहा "चलो भाई बारातियों के स्वागत के लिए आगे चलते है" कुछ पांच छह लोग उठ खड़े हुए "चलिए ..चलिए"
केनाल बावड़ी एक लैंडमार्क था जो शादी के स्थल से पांचसौ मीटर की दूरी पर होगा...हालांकि बारात को यहाँ तक आते आते लगभग एकाध या ड़ेढ घण्टा लग सकता है...क्योंकि वहाँसे बाराती बेंड के साथ नाचते हुए आते है। करीब दोपहर के एक बजे का समय होगा..शादी का मुहुर्त तीन से साढेचार बजे तक का है, उस हिसाबसे बारात लग्नमड़प तक पहोंच ही जाती है।
दुल्हन के घरकी और आसपास की महिलाओं की चहल पहल और बढ़ गई...वैसे कोन क्या कह रहा है, क्या कर रहा है इस बात का कोई ज्यादा महत्व नही है उतना, पर उत्सुकता और उत्साह कुछ ज्यादा बढ़ जाते है। दुल्हन के लिए ब्यूटीपॉर्लर वाली महिला की व्यवस्था की गई है, जो दुल्हन का सारा साज-सँवरने का काम सम्भाल लेती है, मेहंदी वालीने तो अगले दिन दुपहर में ही दुल्हन के हाथोंमें खूबसूरत मेहंदी रचा ली थी, बाकी मौसी, दीदी, फूफी, भाभी वगेरे ने भी अपने अपने हाथोंमें महेंदी लगवा दी थी, यह आजकल जरूरी हो गया है, मेहंदी और ब्यूटीशियन। खाने के कुक का इंतेजाम होता है जो अपनी टीम के साथ अगले दिन रातमे ही आ जाता है, और जो भी पकवान या मिठाई बनानी होती है उसकी तैयारी में जुट जाता है, यह खाना बारातियों और स्नेहीजनों के लिए तो होता है साथ ही साथ सारे गांवके लिए भी खाने की भी यह व्यवस्था होती है। कुल मिलाकर पूरे गांवमें एक उत्सव का सा माहौल होता है।
बारात पहोंच रही है यह बात बेंडबाजेकी धुनोंसे पता चल जाता है। बारात कुछ दस पंद्रह किलोमीटर दुरके गांवसे आई है, जिंसमे सारी बारात लक्ज़री बसों में आती है, दूल्हे के लिए एक सजावट वाली कार होती है जिंसमे दूल्हे के मातापिता और साथमे शादीशुदा बहन सजी हुई थाली के साथ बैठती है। यहाँ रिवाज ऐसा है कि दुल्हन के परिवार की ओर से एक घोड़े की व्यवस्था की जाती है, जिसपर बैठाकर दूल्हे को लग्नस्थल तक लाना होता है, घोड़े की व्यवस्था लगभग दुल्हन के फुफ्फी की और से ही किया जाता है।
गांव की अंदर आती एक हुई सड़क है जो गांव के प्रवेश द्वार से होकर गांवके अंदरूनी विस्तारमे जाती है, जहाँ चारो और लगभग सौएक घर होंगे, गांव में शादी होती है तो सभी परिवार उसमें शरीक होते है, सभी एकदूसरे के प्रति प्रेम और आदर के भाव सहित रहते है, गांव में समाजके मुताबिक अलग अलग कस्बे है, जो उनके अपने अपने विस्तारमे रहते है, जिंसमे आसपास अलग अलग जाती के लोग बस्ते है, और वो एकदूसरे के साथ कोई दखलंदाजी नही करते।
बारात के स्वागत के लिए गांवके प्रवेशद्वार पर कुछ बुज़ुर्ग लोग आए हुए है, साथ मे गांवके मुखिया और गांव के कुछ कार्यकर्ता भी शामिल होते है। यहाँ पर दूल्हे को घोड़े पर सवार होकर लग्नमंडप तक ले जाया जाता है, जो दुल्हन के घर के आँगनमे ही होता है।
एक सफेद रंग का खूबसूरत घोडे को सजाकर दूल्हे के लिए तैयार है, उसका रखवाला घोड़े की लग़ाम लिए खड़ा है, जो घोड़े के साथ साथ लगामको पकड़े हुए साथ साथ चलता है, और घोड़ा उसके काबू में रहता है।
बारात गांव के प्रवेशद्वार पर आ गई है, कुल दोसौ तिनसों बाराती होंगे, कुछौकी अपनी खुदकी कारें है, बाकी जो बसोमे आये थे, वो केनाल बावड़ी से बारात के साथ पैदल चलकर आये है, कुछ युवा लड़के लडकिया बैंडबाजे में बजती फिल्मीधुनो पर नाच रहे है, उनमे कुछ महिलाएँ और पुरुष भी है, जो अपनी अपनी मस्ती में एकदूसरे के साथ मस्ती मजाक करते हुए नाच रहे है, कुछ प्रोफेशनल तरीके से नाचने का प्रयास करते रहते है, जिनको शादियोंमें नाचनेका खूब अनुभव होता है, तो कई ऐसे भी है जो पहलीबार किसीके जबरजस्ती खिंचे जानेपर बेंड से ताल मिलानेका असफल प्रयास करते है, शरुआत की ज़िज़ेक थोड़ी देर में भीड़मे खो जाती है और अगली किसी शादी तक ये भी अपनेआपको नाचने लायक बना ही देंगे। जो दूल्हे के नज़दीकी रिश्तेदार है, उनको जैसे नाचना खूब जरूरी हो वैसे बरातमे सभी से आगे, हाथोंको लहरालहरा कर नाचते है, ताकि फ़ोटो में बराबर क्लिक होते रहे और विडियोशूटिंग वाला भी मजबूर हो जाये उन्हें विडियोमें कैद करने के लिए।
दुल्हा एक सजावट वाली सफेद गाड़ीसे, जिसको गुलाब और अन्य फूलोंसे खूब सजाया हुआ है, पिछली सीटका दरवाजा खोलकर बाहर निकलता है, एक खूबसूरत जोधपुरीं जामे में सज्ज हैंडसम दूल्हा है, दुल्हन की और से स्वागत में आये हुए लोग दूल्हे से और उनके परिवार के सदस्यों से हस्तधनून और नमस्कार करके हास्य द्वारा औपचारिकता निभाते है, कोई कहता है "अरे भाई घोड़ा यहाँ पर ले आओ" घोडेवाला अपने सजे हुए घोडे को दूल्हा जहाँ खड़ा है वहाँ ले आता है, दूल्हे की शादीशुदा बहन जो उसके साथ है वो इस पूरी शादिमे अपने पति के साथ दूल्हे के साथ साथ हरकदम पर रहती है, जीजाजी ने दूल्हे के सर पर पहना हुआ साफा सही और गले का हार ठीकठाक किया, दूल्हे को रुमाल दिया जिससे उसने अपने चहेरे को हलका सा पफ कर लिया, दूल्हे को घोड़े पर बिठाने के लिए जीजाजी और कुछ दोस्तोने मदद की, अब उस खूबसूरत घोड़े पर दुल्हेराजा सवार हो चुके, उसके हाथोंमें फुलोंका एक गुलदस्ता और नारियल थमा दिया, तभी दूल्हे की भाभी अपने चार साल के बच्चे को दिखाते हुए बोली "इसको बिठा दो साथ मे घोड़े पर आगे" किसीने बच्चे को उठाया तो बच्चा डरने लगा घोड़े के सामने जाकर तब भाभी बोली " अरे कुछ नही होता, देख चाचू है ना, उनकी गोदी में बैठ जा" तभी एक लड़के ने बच्चे को उठाकर दूल्हे के साथ आगे बिठा दिया, दूल्हे ने उसे अपने आगोश में ले रखा था, जिससे बच्चा अब स्वस्थ हो गया और मम्मी जी को भी राहत। बारात अब दुल्हन के घर की और प्रस्थान करने लगी कुछ लड़के लड़कियां और कुछ महिला और पुरुष बारातमे आगे आगे नाच रहे है, उनके पीछे बैंडबाजा वाले और उनके पीछे घोडेपर सवार राजकुमार की तरह आकर्षक दुल्हेराजा औए उनके पीछे मंगलगीत गाती हुई महिलाएं और फिर बाकी बाराती, इस तरह पूरा रसाला विवाह स्थल याने दुल्हन के घर लग्नमड़प की और आगे बढ़ रहे है। .....इस बारातमे दो बड़ी आकर्षक आंखे है, जो बेकरारी से शायद किसीको ढूंढ रही है, सहज सुंदर गोरा कमनीय बदन है उसका, उसके बाल काले घने और लंबे है, गोरे चहरे पर यह उसकी मोटी कजरारी आँखे लुभावनी लगती थी। उसने गुलाबी रंग का नक्काशीदार पंजाबी सूट और जामुनी रंग का सलवार पहना हुआ है, एक तरफ कांधे पर पिंक कलर का दुपट्टा रखा है जिसके किनारों पर मोतियोंकी सुंदर लड़ी सी लटकन ने उस दुपट्टे को और भी आकर्षित कर दिया है, कुल मिलाकर कॉटन का यह खूबसूरत वस्त्रपरिधान उसपर फबता था!! पूरी बारात के शोर शराबे और चकाचौंध में अगर कोई युवा उसको पलभर देख लेता है, तो उसकी सादगी से स्तब्ध हो जाए और आसपास का बारात का शोरगुल वाला वातावरण अचानक ही उसे बड़ा ही परमशान्ति प्रिय लगने लगे, वैसे इस गांव के कई युवा उसकी सुंदरता को एक नज़र देख कर धन्य हो रहे थे।....पर उस मानूनी को इस बात का जरा सा भी अंदेशा न होगा शायद, क्योंकि उसकी वो कजरारी आंखे किसी विशेष आंखों के मिलन को उत्सुक थी....जो कहीं दिखाई नही दे रही थी।
क्रमशः
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