Thursday, January 20, 2022

१.सागर की करुणा या करुणा का सागर-एक गज़ब प्रेमकथा!!

 



बारिश हो रही है शाम साढ़ेसात या आठ बजे करीब का समय होगा, और वो तेजी से गांव की पक्की सड़क पर अपनी मस्तिमें बारिश में भिगने का पूरा आनंद लेता हूआ, अपनी बाइक पर संवार हो कर अपने घर की और जा रहा था! बारिश की बरसती बूंदों में भी, पूरी तरहसे खिला हुआ चंद्रमा वातावरण को आह्लादक बना रहा था, उसने सोचा न था कि, बारिश इतनी तेज हो जाएगी, आज पहले ही दिन बारिश ने अपना रंग दिखा दिया!!

...बस अब घर के करीब एक किलोमीटर की दूरी थी कि, एक बिजली का खंभा उखड़कर सड़क पर आ गिरा, वो कुछ सोचे संभले उसके पहले उसने काबू खोया और उसकी तेज बाइक उस सड़क पर गिरे खंबे से टकराई और एक जोरदार झटके के साथ वो उछला और उसके हाथों से बाइक का हेंडल छूट गया और वो एक ऊंचाई तक उछल कर पक्की सड़क पर उल्टे सिर गिरा, एक फटाक सी आवाज़ हुई और वो बेहोश हो गया!!

....कुछ क्षणों के बाद वो उठा, उसने पाया कि वो बिल्कुल हल्का सा महसूस कर रहा है, उसने अपनी बाइक के बारेमे सोचा और वो इधर उधर देखें या कुछ सोचे उसके बिल्कुल सामने एक प्रकाशकी किरन सी दिखाई दी और उसे ऐसा लगा या वो यह सोच नही पाया कि, वो रोशनी की कीरन उसे आकर्षित कर रही है या वो खुद बेबस सा होकर उसकी और खींचा जा रहा है, पलक ज़पकते ही वो प्रकाश की किरन मानो एक प्रकाशपुंज बनकर उसके सामने आ गई और वो जैसे उसमे समा सा गया!!

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अरे ..उठो अभी!! आठ बज चुके है.…पड़ोस में शादी है...और तुम अभी तक सो रहे हो..चलो उठो और वहाँ जाकर कुछ काममें हाथ बंटाओ ...माँ ने ये कहेते हुए उसे बिस्तरमे ज़िंज़ोड दिया था ..

वो रात देर तक गिटार की प्रैक्टिस कर रहा था इसीलिए आंख सुबह जल्द खुल नही रही थी ...वो बिस्तरसे उठा औए दरवाजे पर रखा टॉवेल लेकर, आंखे मलते हुए सीधा बाथरूम में नहाने के लिए गया..गांवमें अब सभीके यहाँ लगभग पक्के मकान और टॉयलेट बाथरूम घरके अंदर ही बनवा लिए गए थे। वैसे वासवा गांव कहनेके लिए गांव था, शहर से कुछ अठारह किलोमीटर की दूरी पर ही था, और जबसे यहां पर शहर में इंडस्ट्रीज आ गई है लोग खेतीबाड़ी के काम से ज़्यादा इंडस्ट्रीजमें किसी कंपनी में बारह घंटे काम करना ज्यादा सहूलियतवाला समझते थे, इस वजह से गांवमें खेतके कामके लिए मजदूर बड़ी मुश्किल से मिलते है। लेकिन इस परिवर्तनमें अब सभी एडजस्ट हो गए है।

वो नहा-धोकर बाहर आया और जीन्स और टीशर्ट पहनकर रेडी हो गया तब माँने कहाँ " दस मिनिट रुक जा...गर्मागर्म पराँठे बना देती हूं चाय के साथ खा कर बाद ही जाना....एक बार वहाँ गया तो काम मे जुट जाएगा और फिर घर आना मुश्किल होगा ....और नास्ता करना रह जायेगा...

वो नाश्ते के लिए तैयार होकर कुर्सी पर बैठकर उसने सामने रखी हुई टिपोय को अपनी और खीँच लिया... माँने चाय और परांठे लाकर टिपोय पर रख दीए...."तुम्हारे पापा तो सुबह सात बजेसे ही गुप्ताजी के घर पहोंच गए है!! " माँने कहा। ..."और तुम भी पहोचो जल्दी...नहीं तो तुम्हारी शादी में कौन आएगा?" अपनी शादी की बात सुनकर उसका दिल एक पल धड़क गया और उसकी सोचमें एक पल के लिए रोक लगी...वो नाश्ता करने लगा।  आजकी शादी वैसे उसके लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है, अपने बचपन के दोस्त संजूकी बहन निशिता की शादी है, निशिता  को वो भी अपनी बहन  ही समझता था, इकलौता होने से उसकी अपनी कोई सगी बहन नहीं थी।...पर ये बात उतनी महत्वपूर्ण नही थी उसके लिए जितनी निशिता की बारात के आने की उत्सुकता!!

....गांवमें शादी ब्याह में सभीके घर जाकर अपनी उपस्थिति जताने को लोग जरूरी समझते है...लोग इसे अपनी नैतिक फर्ज समझते थे सारे गांव के युवा लड़के शादीब्याह वाले घर जाकर मिलजुलकर कुछ ना कुछ काममे जुटे रहते है ...गांवकी महिलाएं कुछ कुछ समय के अंतर पर शादिवाले घर के चक्कर काटती रहती थी, शहरीकरणका एक फायदा ये हुआ कि शादी ब्याह के दिन कुक को आर्डर दे दिया जाता है ताकि घर की महिलाएं फ्री रहे और शादी में सजने धजने के लिए उनको पूरा वक्त मीले!! लड़कियां दुल्हन के आसपास उसके लाड़ लड़ाते रहते है और उनके हंसी मजाक चलते रहते है.…बूढ़े बुजुर्ग वहां पर ज्यादातर गप्पे लड़ाते रहते है मगर उनकी यह हाज़री भी ऐसे मौकों पर उस स्थान की शोभा बढ़ाती है...इतने सबकुछ के बावजूद भी घरके मालिक को हमेशा कुछ न कुछ चिंता बनी रहती है...जो अस्वाभाविक सा होकर भी स्वाभाविक होता है!!

क्रमशः


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४.सागर की करुणा या करुणा का सागर-एक गज़ब प्रेमकथा!!

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